मंगळवार, ४ जानेवारी, २०२२

कर्तव्यग्रहण

मूळ बंगाली
কে লইবে মোর কার্য, কহে সন্ধ্যারবি।
শুনিয়া জগৎ রহে নিরুত্তর ছবি।
মাটির প্রদীপ ছিল, সে কহিল, স্বামী,
আমার যেটুকু সাধ্য করিব তা আমি।

लिप्यंतरण
के लइबे मोर कार्य, कहे सन्ध्यारवि।
शुनिया जगत् रहे निरुत्तर छबि।
माटिर प्रदीप छिल, से कहिल स्वामी,
आमार जेटुकु साध्य करिब ता आमि।

भाषान्तर
"कोण घेईल माझं कार्य?..."
विचारे अस्ताला जाणारा सूर्य.
ऐकत राहतं ज्याला जगत
पसरे छाया गडद, निरुत्तर.
एक असते मातीची पणती
आश्वासत म्हणते जी,
"मालक, करता येईल तेवढं
करीन, मी."

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा